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43 वर्षों से अधर में सिंधुवारिणी जलाशय योजना, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जीत से जुड़ी किसानों की उम्मीदें,

बिहार सरकार की बहुप्रतीक्षित सिंधुवारिणी जलाशय योजना अब भी अधर में लटकी हुई है। हवेली खड़गपुर प्रखंड के खड़गपुर झील के पश्चिमी पहाड़ी पर प्रस्तावित यह परियोजना वर्ष 1982 में स्वीकृत हुई थी। क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने वाली यह परियोजना तकनीकी जटिलताओं, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक धीमेपन की भेंट चढ़कर चार दशक से पूर्ण होने की प्रतीक्षा में है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि यह परियोजना समय पर जमीन पर उतरती, तो सूखे और अनियमित मानसून से परेशान इलाके की कृषि तस्वीर पूरी तरह बदल सकती थी। धान, गेहूं, मक्का और सब्ज़ी उत्पादन में भारी वृद्धि संभव थी। लेकिन वर्षों की देरी ने किसानों में नाराज़गी भी पैदा की है, हालांकि उम्मीदें अब भी कायम हैं।

हाल के दिनों में परियोजना स्थल पर निर्माण सामग्री की चोरी का मामला भी सामने आया है। पुलिस द्वारा तीन आरोपितों की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट किया है कि अधूरी परियोजना के कारण साइट की सुरक्षा स्वयं एक चुनौती बनी हुई है।

प्रशासनिक स्तर पर कई बार समीक्षा बैठकों के बावजूद जमीनी प्रगति सुस्त बनी हुई है। भूमि से जुड़े मामलों, वन विभाग की स्वीकृति और तकनीकी सर्वेक्षण जैसे प्रमुख चरण अभी भी पूरी तरह निपट नहीं पाए हैं।

इसी बीच स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने नई उम्मीद भी जताई है। उनके अनुसार तारापुर विधानसभा क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जीत के बाद इलाके के लोग मांग कर रहे हैं कि अब इस जलाशय योजना को प्राथमिकता मिले और सरकार इसे शीघ्र पूर्ण कराए। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र को लंबे समय से इस परियोजना का इंतज़ार है और अब नेतृत्व मजबूत होने से काम तेज़ होने की उम्मीद है।

फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर हैं। चार दशक से अधिक समय से लंबित इस योजना का भविष्य क्या होगा—यह सवाल अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन ग्रामीणों की ताजा उम्मीदों ने इस परियोजना को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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