राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर मिथ्या सूचनाओं से संघर्ष में प्रेस की भूमिका पर जोर,

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर रविवार को जिला जन सम्पर्क कार्यालय, मुंगेर में जिले के वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की उपस्थिति में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी राघवेंद्र कुमार दीपक ने की। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा निर्धारित विषय “Safeguard Press Credibility Amidst Rising Misinformation” पर आयोजित इस संगोष्ठी में बदलते मीडिया परिदृश्य, गलत सूचनाओं के प्रसार तथा प्रेस की विश्वसनीयता की चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुंवर, राणा गौरी शंकर, कृष्णा प्रसाद, मनीष कुमार, लालमोहन महाराज, अबोध ठाकुर, कामेश कुमार, अमृतेश कुमार सिन्हा, नरेश आनंद और विनोद कुमार सहित कई पत्रकार उपस्थित रहे।

डीपीआरओ ने जताई जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता :-
अध्यक्षीय संबोधन में डीपीआरओ राघवेंद्र कुमार दीपक ने सभी पत्रकारों को राष्ट्रीय प्रेस दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तकनीक के तेज विकास के साथ-साथ भ्रामक सूचनाओं का खतरा भी बढ़ा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आवाज और वीडियो की नकल तथा फोटो-वीडियो में छेड़छाड़ की घटनाएँ प्रेस की विश्वसनीयता को चुनौती दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध वीडियो या समाचार को बिना सत्यापन के प्रसारित करने से न केवल खबर की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि समाज पर भी उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए मीडिया संस्थानों द्वारा तथ्यों की सूक्ष्मता से जांच और संबंधित व्यक्तियों की बाइट लेने की प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने उठाया सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री का मुद्दा :-
संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुंवर ने कहा कि सत्यापन रहित खबरें प्रसारित करना पत्रकारिता की मूल आत्मा के विरुद्ध है और यह समाज में भ्रम फैलाता है।
राणा गौरी शंकर ने सोशल मीडिया पर बढ़ती गैर-तथ्यात्मक रिपोर्टिंग को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि व्यूज और ट्रेंड के दबाव में कई लोग तथ्यहीन जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है, इसलिए जो खबरें प्रकाशित हों, वे सत्य एवं संदर्भपूर्ण हों, ताकि जनता भ्रमित न हो बल्कि जागरूक बने।
कार्यक्रम के अंत में पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि प्रेस की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता है और इसे बनाए रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।




