मननपुर–खड़गपुर–बरियारपुर रेल लाइन 20 वर्षों से ठप, जनहित की महत्वपूर्ण परियोजना कागज़ों में कैद,

पूर्वी बिहार के लोगों की दशकभर से प्रतीक्षित मननपुर-भाया-खड़गपुर-बरियारपुर रेल मार्ग परियोजना अब भी अधर में लटकी हुई है। लगभग 68 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन का सर्वे वर्षो पहले पूरा हो चुका है, लेकिन आज तक न निर्माण कार्य शुरू हुआ, न ही कोई ठोस सरकारी घोषणा सामने आई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना मुंगेर, जमुई और आसपास के क्षेत्रों के लिए रोजगार, व्यवसाय और आवागमन की नई संभावनाएँ खोल सकती है, परंतु सरकार की उदासीनता से यह योजना करीब दो दशकों से ठप है।
सर्वे पूरा, बजट कागज़ों में, पर काम शून्य :-
बरियारपुर से मननपुर तक बनने वाली इस रेल लाइन के लिए प्रारंभिक सर्वे पूरा हो चुका है। लगभग ₹820 करोड़ की लागत का अनुमान भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन वास्तविक बजट आवंटन अब तक नहीं हुआ। कई वर्षों तक बजट में मात्र प्रतीकात्मक राशि दर्शाई जाती रही, जिसके कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
स्थानीय लोग बताते हैं कि “रेल लाइन का सपना हर साल बजट आने पर ताज़ा होता है, लेकिन घोषणा सिर्फ़ फाइलों तक सीमित रहती है।”
विकास की गति पर ब्रेक :-
इस रेल लाइन से हवेली खड़गपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को सीधी कनेक्टिविटी, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा, छात्रों और मरीजों को आसान परिवहन सुविधा एवं मुंगेर-जमुई के बीच तेज़ आवागमन जैसे कई लाभ मिलने की उम्मीद थी। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि न भूमि अधिग्रहण आगे बढ़ा, न डीपीआर पर अंतिम मुहर लगी।
लोगों में बढ़ती नाराज़गी, शासन से जवाबदेही की मांग :-
बरियारपुर, खड़गपुर और मननपुर क्षेत्र के नागरिक संगठन कई बार आंदोलन और जनदबाव बना चुके हैं। उनका कहना है कि जब पड़ोसी ज़िलों में नई रेल परियोजनाएँ गति पकड़ रही हैं, तब यह महत्वपूर्ण लाइन जानबूझकर उपेक्षित छोड़ी गई है।
नागरिकों का कहना है— “यदि सरकार चाह ले, तो यह लाइन दो-तीन वर्षों में तैयार हो सकती है। परंतु समस्या इच्छाशक्ति की कमी की है।”
सरकारी चुप्पी बनी सवाल :-
रेल मंत्रालय और संबंधित विभागों की ओर से परियोजना पर अब तक कोई स्पष्ट स्थिति नहीं दी गई है। इससे लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्यों यह महत्वपूर्ण रेलखंड वर्षों से फाइलों में धूल खा रहा है?
स्थानीय जनता आने वाले बजट में इस परियोजना के लिए ठोस घोषणा की उम्मीद कर रही है।




