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21 वर्षों के संघर्ष के बाद नक्सलबाद पर निर्णायक प्रहार, बिहार नक्सलमुक्त होने की ओर — डीआईजी राकेश कुमार,

डॉ सुरेश कुमार,  मुंगेर।
नक्सलबाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पुलिस प्रशासन को 21 वर्षों का लंबा, कठिन और बलिदानों से भरा सफर तय करना पड़ा। यह बात डीआईजी राकेश कुमार ने हवेली खड़गपुर थाना परिसर में आयोजित शहादत दिवस कार्यक्रम के दौरान कही। वे 5 जनवरी 2005 को भीमबांध क्षेत्र में नक्सली हिंसा में शहीद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्वर्गीय के.सी. सुरेंद्र बाबू सहित छह वीर पुलिसकर्मियों के बलिदान को नमन करते हुए संबोधित कर रहे थे।
डीआईजी राकेश कुमार ने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प के कारण ही आज नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पूर्व राजेंद्र श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय के मैदान में तीन लाख रुपये के इनामी तीन नक्सलियों ने सशस्त्र अवस्था में पुलिस प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया। यह घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है और वे मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि अब हवेली खड़गपुर और मुंगेर ही नहीं, बल्कि पूरा बिहार नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। वर्तमान में राज्य के केवल पांच जिलों में नक्सली गतिविधियों के नाम पर पुलिस प्रशासन द्वारा सतर्क निगरानी रखी जा रही है, लेकिन बिहार में अब कोई भी जिला ऐसा नहीं है जिसे नक्सल प्रभावित या नक्सलबादी जिला कहा जा सके।
डीआईजी ने कहा कि यह सफलता केवल पुलिस बल की नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के सहयोग, खुफिया तंत्र की मजबूती और सरकार की स्पष्ट नीति का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की प्रक्रिया भी प्रशासन की प्राथमिकता में है, ताकि स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उपस्थित अधिकारियों व जवानों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। डीआईजी राकेश कुमार ने अंत में कहा कि शांति, विकास और कानून का राज बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा और शहीदों के सपनों का बिहार बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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