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मुंगेर में नक्सलवाद को बड़ा झटका, तीन कुख्यात माओवादी हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे,

बिहार में दशकों से चली आ रही नक्सल समस्या के खिलाफ चलाए जा रहे सतत् नक्सलरोधी अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। मुंगेर जिला, जो प्रारंभ से ही उग्रवाद से प्रभावित रहा है, अब तेजी से नक्सलमुक्ति की ओर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में  हवेली खड़गपुर राजेंद्र श्री कृष्णा उच्च विद्यालय मैदान के नंदलाल बसु मंच पर  मुंगेर पुलिस द्वारा आयोजित आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति के तहत  भाकपा (माओवादी) के तीन कुख्यात नक्सलियों ने हथियारों सहित सशस्त्र आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की।
आत्मसमर्पण करने वालों में नारायण कोड़ा – जोनल कमांडर (ZCM), निवासी पैसरा, थाना लड़ैयाटांड़, जिला मुंगेर, बहादुर कोड़ा – सब-जोनल कमांडर (SZCM), निवासी बघेल, थाना हवेली खड़गपुर, जिला मुंगेर, तथा बिनोद कोड़ा – दस्ता सदस्य, निवासी शीतला कोड़ासी, थाना कजरा, जिला लखीसराय शामिल हैं।
इन तीनों पर कुल मिलाकर दर्जनों नक्सली कांड दर्ज थे। आत्मसमर्पण के दौरान नारायण और बहादुर कोड़ा ने अपने साथ दो इंसास राइफल, चार एसएलआर राइफल, करीब 500 राउंड गोली और 10 वॉकी-टॉकी भी पुलिस को सौंपे।
भीमबांध क्षेत्र रहा है नक्सल गतिविधियों का केंद्र :-
उल्लेखनीय है कि भीमबांध (खड़गपुर पहाड़ी) क्षेत्र लगभग 660 वर्ग किलोमीटर में फैला घना जंगली और दुर्गम इलाका है, जिसमें 311 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मुंगेर जिले में आता है। यह इलाका 2000 के दशक से नक्सल गतिविधियों का गढ़ रहा है। धरहरा, लड़ैयाटांड़, बरियारपुर, शामपुर, हवेली खड़गपुर, टेटियाबंबर और गंगटा थाना क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे, जिससे विकास की रफ्तार प्रभावित हुई ।
नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए इन दुर्गम इलाकों में सीएपीएफ और एसटीएफ के कैंप स्थापित किए गए। लगातार चले अभियानों के कारण नक्सल संगठन के शीर्ष नेता प्रवेश उर्फ सहदेव सोरेन और अरविंद यादव झारखंड की पहाड़ियों में भागने को मजबूर हुए और वर्ष 2025 में झारखंड में हुई मुठभेड़ में मारे गए। इसके बाद से संगठन की कमर टूटती चली गई।
आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति का असर :-
सरकार की उदार आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के दबाव और जनसहयोग के चलते हाल के दिनों में नक्सली संगठन लगातार कमजोर हुआ है। इससे पूर्व एरिया कमांडर रावण कोड़ा और भोला कोड़ा के आत्मसमर्पण के बाद संगठन को बड़ा झटका लगा था। इस अवसर पर उनके परिजन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
मिलेंगी ये सुविधाएं :-
आत्मसमर्पण के बाद बिहार सरकार और मुंगेर जिला प्रशासन की ओर से नक्सलियों एवं उनके परिवारों को व्यापक पुनर्वास सुविधाएं दी जाएंगी। इसके तहत—
घोषित इनाम की राशि: ₹3,00,000
आत्मसमर्पण प्रोत्साहन राशि: ₹2,50,000
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण भत्ता (36 माह): ₹3,60,000
हथियार व गोला-बारूद जमा करने पर प्रोत्साहन राशि: ₹1,11,509
वॉकी-टॉकी जमा करने पर: ₹50,000
इसके अतिरिक्त प्रशासन की ओर से पुनर्वास के लिए भूमि (एसटी वर्ग हेतु 5 डिसमल), प्रधानमंत्री आवास, जन वितरण प्रणाली की दुकान, सरकारी रोजगार/पेंशन योजनाएं, सुरक्षा हेतु आग्नेयास्त्र लाइसेंस, बच्चों की शिक्षा एवं विवाह योजनाओं का लाभ, पशुपालन अनुदान, चापाकल व शौचालय, आयुष्मान कार्ड, लेबर कार्ड, जीविका योजना तथा आदिवासी समाज के बच्चों के लिए एकलव्य विद्यालय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन ने  किया स्वागत :-
इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों डी.जी.पी. विनय कुमार, ए.डी.जी हेड क्वाटर कुंदन कृष्णन, आई. जी. विनय कुमार, डी. आई. जी मुंगेर  राकेश कुमार, एस. पी. ऑपरेशन एस. टी. एफ  संजय कुमार सिंह,  एस. पी. मुंगेर सैयद  इमरान मसूद, डीएसपी सुनील शर्मा व सुमित आर्य सहित अन्य पदाधिकारियों  की उपस्थिति में आत्मसमर्पण कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों ने इसे मुंगेर जिले में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और आत्मसमर्पित नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने का स्वागत किया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास, सुरक्षा और पुनर्वास है, ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों के लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
कौन है नारायण कोड़ा  :- 
हवेली खड़गपुर राजेंद्र श्री कृष्णा उच्च विद्यालय मैदान के नंदलाल बसु मंच पर  मुंगेर पुलिस द्वारा आयोजित आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति के तहत नक्सली हथियारों सहित सशस्त्र आत्मसमर्पण करने वाले में पहला नाम नारायणपुर के नाम से कुख्यात नारायण कोड़ा भाकपा (माओवादी) संगठन का सक्रिय सदस्य एवं जोनल कमांडर (ZCM) बताया जाता है। वह पे०-स्व० रतु कोड़ा का पुत्र है। नारायण कोड़ा का स्थायी पता ग्राम पैसरा, पंचायत आजीमगंज, प्रखंड धरहरा, थाना लड़ैयाटाँड, जिला मुंगेर है। नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में उस पर सरकार द्वारा ₹3,00,000 (तीन लाख रुपये) का इनाम घोषित है। नारायण कोड़ा की माता का नाम तिलिया देवी है, जिनकी आयु लगभग 68 वर्ष बताई जाती है। उसकी पत्नी रूना देवी हैं, जिनकी उम्र लगभग 35 वर्ष है। नारायण कोड़ा के दो पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। पुत्र शान्तनु कोड़ा (उम्र लगभग 18 वर्ष), जिनकी पत्नी का नाम गौरी कुमारी है। दूसरा पुत्र संजीत कुमार (उम्र लगभग 10 वर्ष)। पुत्रियों में सपना कुमारी (उम्र लगभग 15 वर्ष), निशा कुमारी (उम्र लगभग 13 वर्ष), नीतू कुमारी (उम्र लगभग 12 वर्ष), तीनों अविवाहित बताई जाती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नारायण कोड़ा लंबे समय से क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और सूचना देने वालों को गोपनीयता के साथ इनाम देने की घोषणा की गई है।
कौन है बहादुर कोड़ा  :-
हवेली खड़गपुर राजेंद्र श्री कृष्णा उच्च विद्यालय मैदान के नंदलाल बसु मंच पर  मुंगेर पुलिस द्वारा आयोजित आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति के तहत नक्सली हथियारों सहित सशस्त्र आत्मसमर्पण करने वाले में दूसरा नाम मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बघेल गांव निवासी भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े सब जोनल कमांडर (SZCM) बहादुर कोड़ा, पिता स्वर्गीय चुटर कोड़ा, का विस्तृत पारिवारिक विवरण सामने आया है। बहादुर कोड़ा पश्चिमी रमनकाबाद पंचायत, प्रखंड हवेली खड़गपुर का निवासी बताया जाता है।
जानकारी के अनुसार बहादुर कोड़ा की पत्नी रूकमा देवी (उम्र लगभग 61 वर्ष) हैं। बहादुर कोड़ा पर लगभग तीन लाख रुपये का इनाम घोषित बताया जा रहा है।
बहादुर कोड़ा के तीन पुत्र हैं। सबसे बड़े पुत्र उपेन्द्र कोड़ा (उम्र लगभग 34 वर्ष) हैं, जिनकी पत्नी शकुंतला देवी हैं। उपेन्द्र कोड़ा के तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें रजनी कुमारी (लगभग 4 वर्ष), वैष्णवी कुमारी (लगभग 2 वर्ष) एवं गौरव कुमार (लगभग 1 वर्ष) शामिल हैं।
दूसरे पुत्र सतन कोड़ा (उम्र लगभग 31 वर्ष) हैं, जिनकी पत्नी फुलवा देवी हैं। उनके परिवार में दो पुत्र जितन कुमार एवं रंजन कुमार, जबकि एक पुत्री राधा कुमारी बताई गई है।
तीसरे पुत्र विडियो कोड़ा (उम्र लगभग 29 वर्ष) हैं। उनकी पत्नी रूकमा कुमारी (उम्र लगभग 19 वर्ष) हैं। उनके एक पुत्र प्रेम कुमार तथा तीन पुत्रियां ब्यूटी कुमारी, सरवा कुमारी एवं राधिका कुमारी हैं।
इसके अलावा बहादुर कोड़ा की एक पुत्री सारो देवी (उम्र लगभग 27 वर्ष) हैं, जिनका विवाह लखीसराय जिले के पीरीबाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत बंगालीबांध गांव में हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, यह पारिवारिक विवरण प्रशासनिक अभिलेखों एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संकलित किया गया है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
 कौन है नक्सली बिनोद कोड़ा उर्फ बिनो कोड़ा :-
हवेली खड़गपुर स्थित राजेंद्र श्रीकृष्णा उच्च विद्यालय मैदान के नंदलाल बसु मंच पर मुंगेर पुलिस द्वारा आयोजित आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति कार्यक्रम के तहत नक्सली हथियारों के साथ सशस्त्र आत्मसमर्पण करने वालों में तीसरा नाम बिनोद कोड़ा उर्फ बिनो कोड़ा का सामने आया है।
आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली बिनोद कोड़ा उर्फ बिनो कोड़ा, पिता सोनेलाल कोड़ा, ग्राम शीतला कोड़ासी, पंचायत बुधौली बंकर, प्रखंड सूर्यगढ़ा, थाना कजरा, जिला लखीसराय का निवासी है। कार्यक्रम के दौरान उसने नक्सली गतिविधियों से नाता तोड़ते हुए हथियारों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
पारिवारिक विवरण :
बिनोद कोड़ा के पिता सोनेलाल कोड़ा हैं। उनकी पत्नी का नाम कंचन देवी है। उनके दो पुत्र एवं दो पुत्रियां हैं।
पुत्रों में
बादल कुमार, उम्र लगभग 17 वर्ष (अविवाहित)
बबलु कुमार, उम्र लगभग 10 वर्ष (अविवाहित)
जबकि पुत्रियों में
काजल कुमारी (विवाहित), जिनके पति गणेश कोड़ा हैं। उनका ससुराल बरियासन, थाना पीरीबाजार, जिला लखीसराय में है।
बबीता कुमारी (अविवाहित) शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार द्वारा निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वे मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। कार्यक्रम को नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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