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उच्चेश्वर नाथ धाम का होगा कायाकल्प: 26.31 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना को मिली मंजूरी, मुंगेर बनेगा नया धार्मिक-पर्यटन हब

बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर जिले के टेटिया बम्बर प्रखंड स्थित देवघरा पहाड़ पर अवस्थित ऐतिहासिक उच्चेश्वर नाथ महादेव मंदिर के समग्र विकास के लिए 26.31 करोड़ रुपये की इको-टूरिज्म परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी योजना से क्षेत्र की तस्वीर बदलने के साथ-साथ इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाभारत काल से जुड़े इस प्राचीन सिद्धपीठ को अर्जुन की तपस्या स्थली के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थल का संबंध अर्जुन के गांडीव तथा महाबली भीम के विवाह से भी जुड़ा हुआ है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिवसीय भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
करीब 150 फीट ऊंचे देवघरा पहाड़ पर स्थित इस धाम के विकास के लिए कुल 26.7 एकड़ क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। परियोजना के तहत शिव थीम पार्क, रोपवे बेस स्टेशन, विवाह मंडप, मेला ग्राउंड, पार्किंग, सेल्फी प्वाइंट, हिल टॉप पार्क और यात्री विश्राम क्षेत्र जैसी आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। साथ ही लगभग 350 सीढ़ियों का निर्माण और पांच यात्री शेड भी बनाए जाएंगे।
परियोजना को तीन जोन में विकसित किया जाएगा। पहले जोन में प्रवेश द्वार, विवाह मंडप, मेला ग्राउंड, शिव थीम पार्क और रोपवे बेस स्टेशन का निर्माण होगा। दूसरे जोन में पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट और बैठने की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जबकि तीसरे जोन में यात्रियों के लिए विश्राम क्षेत्र और मंदिर तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में परिसर में मौजूद शिव गंगा तालाब, राधा-कृष्ण मंदिर, दुर्गा मंदिर, शनि देव मंदिर, विवाह भवन और अन्य संरचनाओं को भी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस योजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इको-टूरिज्म मॉडल के जरिए प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था के संतुलन को बनाए रखते हुए यह स्थल भविष्य में देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

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