लोकल न्यूज़
खड़गपुर झील की वादियों में गूंजा काव्य-सुर, जागृति मंच का कवि सम्मेलन सह वनभोज संपन्न,

खड़गपुर झील की रमणीय वादियों के बीच जागृति मंच की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन सह वनभोज कार्यक्रम ने साहित्य प्रेमियों को भाव, रस और विचार की अनुपम अनुभूति कराई। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. महेश चंद चौरसिया ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी शशि आनंद अलबेला ने कुशलतापूर्वक निभाई। मुख्य अतिथि के रूप में सुल्तानगंज के प्रख्यात कवि डॉ. श्याम सुंदर आर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक ज्योतिष चंद्र थे।

कवि भावानन्द सिंह प्रशांत ने “मुहब्बत मुस्कुरुओं की रात है चांदनी में…” जैसी पंक्तियों से प्रेम का रंग बिखेरा। डॉ. अंजनी कुमार सुमन ने “आते-जाते, आना-जाना जान गए…” रचना के माध्यम से संवेदनाओं को स्वर दिया।
संजीव प्रियदर्शी तानियों ने सामाजिक चेतना से जुड़ी रचना “नित पिया गांजा शराब हो…” प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं।
साथी सुरेश सूर्य देव ने अपनी कविता में हवेली खड़गपुर झील के प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव चित्रण करते हुए कहा— “बहुत सुखद है खड़गपुर का वातावरण।”
नरेश कुमार बिंद ने “तुम नहीं हो, तुम्हारा एहसास क्यों है…” के माध्यम से विरह भाव को उकेरा।
संयोजक ज्योतिष चंद्र ने “वियोगी मन का पीर लिखता हूं…” रचना प्रस्तुत की।
भोला कुमार ने “ठंड की धुंध में सूर्य ढूंढता हूं…” कविता से वातावरण को भावुक बनाया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. महेश चंद्र चौरसिया ने कहा— “खाली हाथ आया था और खाली हाथ ही जा रहा हूं,” जिससे जीवन-दर्शन की गहरी झलक मिली।
इसके अतिरिक्त शिवकुमार जुल, अनिल भारतीय सादिल, संगीता चौरसिया, यादवेन्दु सुधीर, उषा किरण साहा, सुधीर प्रोग्रामर, दिनकर कुंज, नागेश्वर नागमणि, रामस्वरूप मस्ताना, डॉ. अंजनी कुमार सुमन, मणीष गुंज, साथी इन्द्रदेव (गीतकार), राज किशोर केसरी सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम का समापन साहित्यिक सौहार्द और आत्मीयता के वातावरण में हुआ। उपस्थित श्रोताओं ने जागृति मंच के इस प्रयास की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की मांग की।





