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उर्दू सर्किल की बैठक : शिक्षा व रॉकेट्री की विरासत पर सारगर्भित चर्चा,

रहबर उर्दू लाइब्रेरी में उर्दू सर्किल की मासिक बैठक अध्यक्ष इरफ़ान आलम की अध्यक्षता में और एहतेशाम आलम के संचालन में  हुई। बैठक की शुरुआत जामा मस्जिद के इमाम मौलाना रागिब रहमानी द्वारा तिलावत-ए-कुरआन से हुई।

स्वागत अतिथि डॉ. ग़ज़ाली अनवर हेलाल ने अपने संबोधन में उर्दू सर्किल के प्रयासों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मंच समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने अपने वक्तव्य में टीपू सुल्तान के विज्ञान एवं रॉकेट्री योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने विंग्स ऑफ़ फायर में लिखा है कि भारत में रॉकेट तकनीक का सपना 18वीं सदी में ही दिख चुका था। टीपू सुल्तान की सेना में 28 ब्रिगेडियर थे, जिनकी टुकड़ियाँ ‘खुसुन’ कहलाती थीं और हर टुकड़ी में रॉकेट मैन का एक दस्ता होता था। तिरुकण्हल्ली युद्ध में टीपू सुल्तान की शहादत के बाद विलियम कांगड़ी ने 900 रॉकेट जब्त किए थे। इसी रॉकेट्री के सपने को आगे स्वतंत्र भारत में पंडित जवाहरलाल नेहरू, विक्रम साराभाई और बाद में डॉ. कलाम ने आगे बढ़ाया।

बैठक में प्रो. जैन शम्सी, प्रो. हुसैन अहमद, खालिद शम्स और जफर अहमद ने उर्दू सर्किल की उपयोगिता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यह मंच मुंगेर में शिक्षा की अलख जलाने और युवाओं में ज्ञान की बेचैनी पैदा करने का कार्य कर रहा है, जिससे समाज में शैक्षिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता रहे।

साहित्यिक सत्र में ज्योति कुमार सिंह, अंजुम हसन, सरवर शादाब, शाकिब शहजादा, अब्दुल्लाह बुखारी, सैयद शमिमुल्लाह, मुंतशिर आलम, मसूद आलम और रईस रज़ा ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बैठक उत्साह, संवाद और साहित्यिक ऊर्जा के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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