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बिहार में पहली बार शिक्षकों की नैतिकता पर कार्यशाला, डीआईईटी मुंगेर में हुआ अभिनव प्रयोग,

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी), पूरब सराय, मुंगेर में बिहार में पहली बार “Educators as a Models of Ethical Behaviour” विषय पर एक दिवसीय गैर-आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला शिक्षकों में नैतिक मूल्यों के विकास की दिशा में एक अनोखा और सराहनीय पहल मानी जा रही है।
कार्यशाला का डिजाइन संस्थान के विद्वान व्याख्याता श्री प्रदीप कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षकों में नैतिकता (एथिक्स) का समुचित विकास हो जाए, तो बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल विषयवस्तु को मस्तिष्क में भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय एवं नैतिक प्रक्रिया है, जिसे मशीनी ढंग से संचालित नहीं किया जा सकता। शिक्षण की गुणवत्ता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब शिक्षकों में नैतिक मूल्यों का विकास हो।

श्री प्रदीप कुमार ने यह भी कहा कि शिक्षकों में नैतिकता का विकास किसी निर्वात में नहीं होता, बल्कि इसके लिए संपूर्ण शैक्षिक तंत्र में नैतिकता लाने की आवश्यकता है। इसमें पदाधिकारियों के सहयोग की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों के लंबित कार्यों की समस्या की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया, जिससे शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कार्यशाला में साधनसेवी के रूप में पूर्व प्रधानाध्यापक एवं वर्तमान व्याख्याता तथा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित श्री पप्पू हरिजन ने भी अपने अनुभव साझा कर प्रशिक्षण को समृद्ध किया। प्रशिक्षण उपरांत मुंगेर जिले के सभी प्रशिक्षुओं द्वारा कार्यशाला के प्रति अत्यंत सकारात्मक एवं प्रेरणादायक प्रतिपुष्टि दी गई।
इस कार्यशाला की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि प्रशिक्षण के अंत में सभी शिक्षकों को शिक्षक एथिक्स कोड पर आधारित प्रतिज्ञा दिलाई गई। शिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने विद्यालयों में कोड ऑफ एथिक्स के अनुरूप कार्य करेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य श्री पंकज कुमार शर्मा एवं सभी व्याख्याताओं द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। आगंतुक साधनसेवी श्री पप्पू हरिजन का स्वागत प्रभारी प्राचार्य एवं वरीय व्याख्याताओं द्वारा किया गया।
इस अवसर पर संस्थान परिवार का पूर्ण सहयोग रहा, जिसमें वरीय व्याख्याता श्रीमती सुजाता कुमारी सहित राकेश कुमार, मधुरिमा मेहता, नीरज कुमार, कुमार बृजनंदन, पूनम सिन्हा, मुकुंद कुमार, अंजना कुमारी, सोनी कुमार, अशोक कुमार एवं श्वेता सुमन सहित अन्य व्याख्याता उपस्थित रहे।




