कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर सदानंद सिंह यादव को मिला “समाज गौरव सम्मान 2026”

हवेली खड़गपुर (मुंगेर), 26 जुलाई। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर रांची में आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में कवि, साहित्यकार एवं लोकगायक सदानंद सिंह यादव को “समाज गौरव सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मां शारदे मंच साहित्यिक एवं सामाजिक निबंधित संस्था, रांची के तत्वावधान में आयोजित वीर सैनिक सम्मान समारोह के दौरान प्रदान किया गया।
मुख्य कार्यक्रम रांची के चुटिया स्थित ब्लू शिवालिक होटल में आयोजित हुआ। समारोह में संस्था की अध्यक्षा नीतू सिन्हा ‘तरंग’, कर्नल संजय सिंह तथा भारत-तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिव्यांशु जी महाराज सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने श्री यादव को प्रशस्ति-पट्ट एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
सदानंद सिंह यादव मूलतः हवेली खड़गपुर (मुंगेर), बिहार के पश्चिम आजीमगंज के निवासी हैं तथा वर्तमान में भारत सरकार के केंद्रीय भू-जल बोर्ड, रांची में कार्यरत हैं।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत श्री यादव ने कारगिल के अमर शहीदों को समर्पित अपना मुक्तक प्रस्तुत किया—
“तिरंगा वीरों ने सर से, जो कफन जान बाँधा है,
अमरता को शहीदों की, दिया हमने भी कांधा है।
शहादत को उन वीरों की कभी भुला नहीं सकते,
कि संगीनों पर सर रखकर, निशाना जिनने साधा है।”
इसके साथ ही उन्होंने अपना चर्चित देशभक्ति लोकगीत “कारगिल सीमा पे दे देलक जान हो, धन्य-धन्य भारत माता, देश के जवान हो” प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा और पूरा सभागार देशभक्ति के रंग में रंग गया।
सदानंद सिंह यादव अपनी बहुआयामी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। वे विलुप्तप्राय लोकगीतों के संरक्षण के साथ-साथ अपनी स्वरचित रचनाओं को भी मधुर स्वर में प्रस्तुत करते हैं। उनकी गायकी में मिट्टी की सोंधी महक, गांव की सादगी और लोक-संस्कृति की आत्मा झलकती है। उन्हें साहित्य, लोकसंगीत एवं सामाजिक योगदान के लिए पूर्व में भी कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
“समाज गौरव सम्मान 2026” मिलने पर साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं से शहीदों की वीरगाथाओं को जीवंत रखा है और लोक-संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का उल्लेखनीय कार्य किया है।




