
पटना, 18 अगस्त 2026। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के नेतृत्व में पटना उच्च न्यायालय में न्यायिक उत्पादकता, मामलों के प्रबंधन और लंबित मुकदमों के निपटारे की गति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। पदभार ग्रहण करने के बाद बीते चार सप्ताह से भी कम समय में न्याय तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने और अदालती प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई प्रशासनिक एवं न्यायिक कदम उठाए गए हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में उच्च न्यायालय में कुल 15,394 मामले दर्ज हुए, जबकि 17,107 मामलों का निपटारा किया गया। इससे न्यायालय की केस क्लियरेंस दर (CCR) 111.13 प्रतिशत रही। निपटाए गए मामलों में लगभग 3,757 दीवानी मामले, जिनमें करीब 2,850 रिट याचिकाएं, तथा 13,350 आपराधिक मामले शामिल रहे। आपराधिक मामलों में लगभग 12,000 जमानत याचिकाएं थीं।
जमानत आवेदनों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया गया है। दोषरहित जमानत आवेदनों को यथासंभव दाखिल किए जाने के एक दिन के भीतर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की व्यवस्था से अत्यावश्यक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति मिली है। इससे अनावश्यक विलंब कम करने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा, जमानत मामलों, अवमानना मामलों (एमजेसी) तथा नए दाखिल रिट याचिकाओं की नियमित एवं व्यवस्थित सूची तैयार किए जाने से मामलों के प्रवाह और निपटारे की गति में और सुधार हुआ है। सुनवाई की समय-सारणी और मामलों की प्राथमिकता में निरंतरता बनाए रखने से न्यायालय के न्यायिक समय का बेहतर उपयोग संभव हुआ है।
विधि समुदाय से जुड़े लोगों ने इन बदलावों को सक्रिय न्यायिक नेतृत्व और प्रभावी न्यायालय प्रशासन का परिणाम बताया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के नेतृत्व में उठाए गए कदमों से न केवल मामलों के निपटारे की दर में वृद्धि हुई है, बल्कि समयबद्ध न्याय और न्यायिक व्यवस्था की कार्यक्षमता के प्रति भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के अब तक के कार्यकाल को पटना उच्च न्यायालय में दक्षता, सुलभता और त्वरित न्याय पर नए सिरे से जोर देने वाले काल के रूप में देखा जा रहा है।
विवेक कुमार
पत्रकार, डिजिटल दर्पण न्यूज़




