भागलपुर रेलवे डिवीजन को लेकर उठे सवाल: पूर्व रेलवे का चौथा सबसे बड़ा राजस्व केंद्र, फिर भी रेलवे बोर्ड ने बताया “नॉन-फिजिबल”

भागलपुर।
रेलवे बोर्ड द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दिए गए जवाब में भागलपुर रेलवे डिवीजन के गठन को “नॉन-फिजिबल” (अव्यावहारिक) बताए जाने के बाद इस मुद्दे पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में कहा है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की समिति द्वारा भागलपुर डिवीजन के गठन की व्यवहार्यता की जांच की गई थी, लेकिन समिति ने इसे संभव नहीं माना।
हालांकि, रेलवे के राजस्व आंकड़े इस निर्णय पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। पूर्व रेलवे के 01 अक्टूबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक के यात्री राजस्व आंकड़ों के अनुसार भागलपुर स्टेशन 19.76 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई के साथ पूर्व रेलवे का चौथा सबसे अधिक राजस्व अर्जित करने वाला स्टेशन है। इस सूची में केवल हावड़ा, सियालदह और कोलकाता स्टेशन ही भागलपुर से आगे हैं।
आंकड़ों के अनुसार भागलपुर स्टेशन ने आसनसोल जंक्शन और मालदा टाउन जैसे प्रमुख स्टेशनों से भी अधिक यात्री राजस्व अर्जित किया है। उल्लेखनीय है कि आसनसोल और मालदा दोनों ही रेलवे डिवीजन मुख्यालय हैं तथा इनके अंतर्गत भागलपुर की तुलना में अधिक ट्रेनों का परिचालन होता है। इसके बावजूद यात्री राजस्व के मामले में भागलपुर उनसे आगे है।
रेलवे विशेषज्ञों और क्षेत्रीय संगठनों का कहना है कि यदि भागलपुर पूर्व रेलवे का चौथा सबसे बड़ा राजस्व केंद्र है, तो उसे डिवीजन का दर्जा देने की मांग को केवल “नॉन-फिजिबल” कहकर खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि भागलपुर पूर्व बिहार, झारखंड और अंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण रेल केंद्र है तथा यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है।
भागलपुर रेलवे डिवीजन की मांग वर्षों पुरानी है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में भी इस संबंध में पहल हुई थी। अब RTI के जरिए सामने आए रेलवे बोर्ड के जवाब और राजस्व आंकड़ों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और रेल उपभोक्ता समूहों ने रेलवे मंत्रालय से मांग की है कि भागलपुर डिवीजन के प्रस्ताव की पुनः समीक्षा कर क्षेत्र की जनभावनाओं और राजस्व योगदान को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।




