
मुंगेर, 16 जून 2026। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। इसका ताजा उदाहरण मुंगेर के फुलहट पाटम निवासी अभिषेक कुमार के मामले में देखने को मिला, जिनकी करीब तीन वर्ष से लंबित भूमि संबंधी समस्या का सफलतापूर्वक निवारण हुआ।
जानकारी के अनुसार, अभिषेक कुमार की माता सुलेखा देवी ने वर्ष 2001 में छोटी संदलपुर स्थित 10 डिसमल भूमि क्रय की थी। खतियान में भूमि का पूरा रकवा दर्ज होने के बावजूद ऑनलाइन जमाबंदी में विक्रेता राजनीति प्रसाद गुप्ता के नाम से 5.7 डिसमल भूमि प्रदर्शित होती रही। इस त्रुटि के कारण अभिषेक कुमार को लगातार परेशानी झेलनी पड़ी और कई बार परिमार्जन आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ लोगों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड का हवाला देकर भूमि पर दावा करते हुए कब्जा करने की धमकी दी। इसके बाद अभिषेक कुमार ने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत 2 मार्च 2026 को अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय, सदर मुंगेर में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के क्रम में मामला जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय पहुंचा और अंततः द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के रूप में जिला पदाधिकारी, मुंगेर के समक्ष अपील की गई। जिला पदाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई की तथा अंचल अधिकारी, सदर मुंगेर को आवश्यक अभिलेखों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं अभिलेखों के अवलोकन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि खेसरा संख्या 1798 की संपूर्ण 10 डिसमल भूमि केवाला संख्या 4905, दिनांक 13 दिसंबर 2001 के माध्यम से सुलेखा देवी के नाम विक्रय की जा चुकी थी। इसके आधार पर ऑनलाइन जमाबंदी पंजी में आवश्यक सुधार कर दिया गया।
समस्या के समाधान के बाद अभिषेक कुमार ने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम को आम लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रभावी कानून बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत शिकायतों की सुनवाई खुली कार्यवाही में होती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। साथ ही शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके निस्तारण तक कोई शुल्क नहीं लगता और वकील रखने की भी आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि उनकी कोई वैध समस्या सरकारी कार्यालयों में लंबित है और उसका समाधान नहीं हो पा रहा है, तो वे लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित, सुलभ एवं पारदर्शी न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।




