केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिला राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल, शिक्षकों के हितों और उच्च शिक्षा सुधारों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

नई दिल्ली। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर शिक्षक एवं उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु न्यायसंगत, व्यावहारिक एवं संवेदनशील निर्णय लेने का आग्रह किया।
महासंघ ने शिक्षक समाज की चिंताओं, विधिक तथ्यों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा मानवीय पक्ष को विस्तार से रखते हुए कहा कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

महासंघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सिन्हा, प्रदेश महामंत्री ज्ञानेन्द्र नाथ सिंह, प्रदेश सचिव अभय कुमार तथा मुंगेर जिलाध्यक्ष कृष्णकांत सिंह ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महामंत्री प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा तथा अतिरिक्त महामंत्री मोहन पुरोहित शामिल थे।
बैठक के दौरान विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 पर भी व्यापक चर्चा हुई। महासंघ ने विधेयक के संबंध में अपने सुझाव और अपेक्षाएं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखते हुए कहा कि इसे ऐसा स्वरूप दिया जाए जो भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम, समावेशी, उत्तरदायी एवं राष्ट्रहितकारी बना सके।
प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा में संस्थागत स्वायत्तता, गुणवत्ता संवर्धन, शिक्षक हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विशेष बल दिया।
इसके अतिरिक्त कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) में आ रही समस्याओं, पीएच.डी. कर रहे शिक्षकों की कठिनाइयों, शोध परियोजनाओं एवं शोध अनुदान की उपलब्धता, महाविद्यालयों एवं छोटे राज्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान अवसरों के विस्तार, रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
महासंघ ने इन सभी विषयों पर केंद्र सरकार से आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की मांग की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए विषयों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।




