भूमि सर्वे में पारदर्शिता को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र, श्वेत-पत्र जारी करने की मांग

मुंगेर, 20 जून 2026। बिहार में चल रहे Revisional Survey एवं Special Survey की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मुरारी प्रसाद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर भूमि सर्वे पर श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि बिहार में भूमि विवादों का मुख्य कारण भूमि अभिलेखों में व्याप्त त्रुटियां एवं विसंगतियां हैं। इन समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा वर्षों से भूमि सर्वेक्षण का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इसकी प्रगति, व्यय और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी आम जनता के समक्ष उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
श्याम मुरारी प्रसाद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य सरकार भूमि सर्वेक्षण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक करते हुए श्वेत-पत्र जारी करे। उन्होंने 38 जिलों में Revisional Survey की स्थिति, दोबारा प्रारंभ किए गए सर्वेक्षणों का विवरण, वर्ष 2012 से चल रहे सर्वे की प्रगति, सर्वेक्षण पर हुए कुल व्यय, Special Survey के परिणाम, विवादों के निपटारे की संख्या तथा प्रचार-प्रसार पर हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी भूमि विवादों से प्रभावित है और पारदर्शिता ही इस समस्या के स्थायी समाधान का आधार बन सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित सभी सूचनाएं 15 दिनों के भीतर विभागीय वेबसाइटों एवं जिला कार्यालयों के सूचना पट्टों पर प्रकाशित की जाएं।
इस संबंध में भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव, राज्य के सभी जिला पदाधिकारियों तथा बिहार सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त को भी प्रेषित की गई है।
श्याम मुरारी प्रसाद ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि जनता को भूमि सर्वेक्षण से संबंधित वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सके।




